भारत के अटॉर्नी जनरल 2023: नियुक्ति, कार्य और सीमा ATTORNEY GENERAL OF INDIA IN HINDI 

ATTORNEY GENERAL OF INDIA IN HINDI  

दोस्तों इस आर्टिकल में आप ATTORNEY GENERAL OF INDIA IN HINDI के बारे में पढ़ेंगे जो आपके सभी परीक्षाओं के लिए बेहद महत्वपूर्ण होगा। ATTORNEY GENERAL OF INDIA  इतिहास से जुड़ा एक बहुत ही महत्वपूर्ण प्रश्न है, जो सबसे ज्यादा बार पूछा गया है। यह प्रश्न चंदेरी की लड़ाई के बारे में है, जो आपको पूरा विस्स्तर से एक-एक कर के पढने वाले है।

New Attorney General of India: 

वरिष्ठ अधिवक्ता आर वेंकटरमणी को तीन साल के कार्यकाल के लिए भारत का नया अटॉर्नी जनरल नियुक्त किया गया है। वेंकटरमणि के.के. वेणुगोपाल का स्थान लेंगे। नए अटॉर्नी जनरल आर वेंकटरमणी होंगे। वर्तमान अटॉर्नी जनरल, के.के. वेणुगोपाल का कार्यकाल 30 सितंबर को समाप्त हो रहा है। वह 91 वर्ष के हैं और अपने तीसरे विस्तार पर हैं।

कानून और न्याय मंत्रालय ने एक ट्वीट में नियुक्ति की पुष्टि की। ट्वीट में कहा गया, “राष्ट्रपति ने एक वरिष्ठ वकील आर. वेंकटरमणी को 1 अक्टूबर, 2022 से भारत का अटॉर्नी जनरल नियुक्त किया है।”

नियुक्ति और पदावधि

महान्यायवादी ( अटार्नी जनरल) की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा होती है। उसमें उन योग्यताओं का होना आवश्यक है, जो उच्चतम न्यायालय के किसी न्यायाधीश की नियुक्ति के लिए होती है। दूसरे शब्दों में,उसके लिए आवश्यक है कि वह भारत का नागरिक हो, उसे उच्चन्यायालय के न्यायाधीश के रूप में काम करने का पांच वर्षों का अनुभव हो या किसी उच्च न्यायालय में वकालत का 10 वर्षों का अनुभव हो या राष्ट्रपति के मतानुसार वह न्यायिक मामलों का योग्य व्यक्ति हो ।
महान्यायवादी के कार्यकाल को संविधान द्वारा निश्चित नहीं किया गया है। इसके अलावा संविधान में उसको हटाने को लेकर भी कोई मूल व्यवस्था नहीं दी गई है। वह अपने पद पर राष्ट्रपति के प्रसादपर्यंत तक बने रह सकता है। इसका तात्पर्य है कि उसे राष्ट्रपति द्वारा किसी भी समय हटाया जा सकता है।वह राष्ट्रपति को कभी भी अपना त्यागपत्र सौंपकर पदमुक्त हो सकता है। यह है कि जब सरकार ( मंत्रिपरिषद) त्यागपत्र दे दे या उसे बदल दिया जाए तो उसे त्यागपत्र देना क्योंकि उसकी नियुक्ति सरकार की सिफ़ारिस से ही होती है।

कर्तव्य एवं कार्य:

  • वह राष्ट्रपति द्वारा संदर्भित या राष्ट्रपति द्वारा सौंपे गए कानूनी मामलों पर भारत सरकार को सलाह देता है।
  • वह राष्ट्रपति द्वारा निर्दिष्ट समान प्रकृति के अन्य कानूनी कर्तव्यों का पालन करता है।
  • वह संविधान या किसी अन्य कानून द्वारा या उसके तहत निर्धारित कार्यों को करता है।

अपने आधिकारिक कर्तव्यों के निष्पादन में,

  • वह सर्वोच्च न्यायालय में उन सभी मामलों में भारत सरकार की ओर से उपस्थित होते हैं जिनमें भारत सरकार संबंधित होती है।
  • वह संविधान के अनुच्छेद 143 के तहत राष्ट्रपति द्वारा सर्वोच्च न्यायालय में किए गए किसी भी संदर्भ में भारत सरकार का प्रतिनिधित्व करते हैं।
  • यदि आवश्यक हो, तो वह सर्वोच्च न्यायालय में किसी भी मामले में भारत सरकार की ओर से उपस्थित होते हैं जिसमें भारत सरकार एक पक्ष है।”

अधिकार और सीमाएं:

  • भारत के अटॉर्नी जनरल को अपने कर्तव्यों का पालन करते हुए भारत की सभी अदालतों में सरकार का प्रतिनिधित्व करने का अधिकार है।
  • अटॉर्नी जनरल को संसद के दोनों सदनों और उनके संयुक्त सत्र की कार्यवाही में बोलने या भाग लेने का अधिकार है, लेकिन वोट देने के अधिकार के बिना।
  • अटॉर्नी जनरल को संसद की किसी भी समिति की बैठक में बोलने या भाग लेने का अधिकार है जिसके लिए उन्हें सदस्य के रूप में नामित किया गया है, लेकिन वोट देने के अधिकार के बिना।
  • वे एक संसद सदस्य को उपलब्ध सभी विशेषाधिकारों और उन्मुक्तियों का आनंद लेते हैं।

अटॉर्नी जनरल निम्नलिखित सीमाओं के अधीन है:

  • उन्हें भारत सरकार के खिलाफ सलाह या ब्रीफिंग नहीं देनी चाहिए।’
  • उन्हें भारत सरकार की अनुमति के बिना आपराधिक मामलों में आरोपी व्यक्तियों का बचाव नहीं करना चाहिए।
  • उन्हें सरकार की अनुमति के बिना किसी भी कंपनी में निदेशक के रूप में नियुक्ति स्वीकार नहीं करनी चाहिए।
  • यह ध्यान दिया जाना चाहिए कि अटॉर्नी जनरल को निजी कानूनी प्रैक्टिस से प्रतिबंधित नहीं किया गया है। वे सरकारी कर्मचारी नहीं हैं, क्योंकि उन्हें कोई निश्चित वेतन नहीं मिलता है और उनका पारिश्रमिक राष्ट्रपति द्वारा निर्धारित किया जाता है।

भारत के महान्यायवादियों की सूची:

भारत का अटॉर्नी जनरल भारत सरकार के मुख्य कानूनी सलाहकार के रूप में कार्य करता है और भारत के सर्वोच्च न्यायालय में सरकार का प्रतिनिधित्व करने वाला प्रमुख वकील है। भारत के अटॉर्नी जनरल की नियुक्ति संविधान के अनुच्छेद 76(1) के तहत भारत के राष्ट्रपति द्वारा की जाती है और वह राष्ट्रपति की इच्छा तक पद पर बने रहते हैं। उन्हें देश का शीर्ष कानूनी अधिकारी भी कहा जाता है।

ATTORNEY GENERAL OF INDIA IN HINDI भारत के वर्तमान अटॉर्नी जनरल आर वेंकटरमणी हैं। उन्हें राष्ट्रपति द्रोपती मुर्मू द्वारा नियुक्त किया गया था और उन्होंने 2 अक्टूबर को औपचारिक रूप से पदभार ग्रहण किया।

इस लेख में भारत के अब तक के सभी अटॉर्नी जनरल या महान्यायवादियों के नाम दिए जा रहे हैं.

क्रम संख्यामहान्यायवादी (नाम)कार्यकाल
1. एम सी सीतलवाड़ (सबसे लंबा कार्यकाल)28 जनवरी 1950 – 1 मार्च 1963
2.सी.के. दफ्तरी2 मार्च 1963 – 30 अक्टूबर 1968
3.निरेन डे1 नवंबर 1968 – 31 मार्च 1977
4.एस वी गुप्ते1 अप्रैल 1977 – 8 अगस्त 1979
5.एल.एन. सिन्हा9 अगस्त 1979 – 8 अगस्त 1983
6.के परासरण9 अगस्त 1983 – 8 दिसंबर 1989
7.सोली सोराबजी (सबसे छोटा कार्यकाल)9 दिसंबर 1989 – 2 दिसंबर 1990
8. जी रामास्वामी3 दिसंबर 1990 – 23 नवंबर 1992
9.मिलन के. बनर्जी21 नवंबर 1992 – 8 जुलाई 1996
10. अशोक देसाई9 जुलाई 1996 – 6 अप्रैल 1998
11.सोली सोराबजी7 अप्रैल 1998 – 4 जून 2004
12.मिलन के. बनर्जी5 जून 2004 – 7 जून 2009
13.गुलाम एस्सजी वाहनवति8 जून 2009 – 11 जून 2014
14.मुकुल रोहतगी12 जून 2014 – 30 जून 2017
15.के.के. वेणुगोपाल30 जून 2017 से 30 सितम्बर 2022
16.आर. वेंकटरमणी1 अक्टूबर 2022 से अब तक

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भारत का महाधिवक्ता

महान्यायवादी के अतिरिक्त भारत सरकार के अन्य कानूनी अधिकारी होते हैं। वे हैं- (भारत सरकार के महाधिवक्ता एवं अपर महाधिवन्ता । जे महान्यायवादी को उसकी जिम्मेदारी पूरी करने में सहायता करते हैं। यह उल्लेखनीय है कि महान्यायवादी का पद संविधान निर्मित है, दूसरे शब्दों में अनुच्छेद 76 में महाधिवक्ता एवं अपर महाधिवक्ता का उल्लेख नहीं है। महान्यायवादी केंद्रीय कैबिनेट का सदस्य नहीं होता। सरकारी स्तर पर विधिक मामलों को देखने के लिए केंद्रीय कैबिनेट में पृथक विधि मंत्री होता है ?

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ATTORNEY GENERAL OF INDIA IN HINDI प्रसन्नोत्री

ATTORNEY GENERAL OF INDIA IN HINDI    के बारे में आपने कई सवाल पूछे होंगे, लेकिन ATTORNEY GENERAL के बारे में आपके सबसे महत्वपूर्ण सवाल आपके लिए बहुत महत्वपूर्ण होंगे।

वर्तमान में भारत के प्रमुख अटॉर्नी जनरल कौन हैं?

आर. वेंकटरमणी भारत के वर्तमान अटॉर्नी जनरल हैं।

भारत के महान्यायवादी की नियुक्ति कैसे की जाती है?

अटॉर्नी-जनरल की नियुक्ति सरकार की सलाह पर भारत के राष्ट्रपति द्वारा की जाती है।

भारत के अटॉर्नी-जनरल के लिए योग्यताएँ क्या हैं?

भारत के अटॉर्नी-जनरल के लिए योग्यताएँ वही हैं जो सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश के लिए हैं, जैसा कि अनुच्छेद 124 में निर्दिष्ट है।

भारत के पहले अटॉर्नी-जनरल कौन थे?

एम.सी. सीतलवाड 28 जनवरी 1950 से 1 मार्च तक इस पद पर सेवा देने वाले भारत के पहले अटॉर्नी-जनरल थे।

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